शनिवार, 29 अगस्त 2020

एक वैज्ञानिक अध्ययन में १४ फलों का अध्ययन विश्लेष्ण करने पर अमरुद पहले पायदान पे बैठा मिला ,पाइनेपल आखिरली ,अनार दोयम ,...... एपिल चौथे पे।



स्वस्थ रहने के लिए,
खाना इसे वरदान है।
नाम का अमरूद है,

लेकिन गुणों की खान है।।
जी हाँ एक वैज्ञानिक अध्ययन में १४ फलों का अध्ययन विश्लेष्ण करने पर अमरुद पहले  पायदान पे बैठा मिला ,पाइनेपल आखिरली ,अनार दोयम ,...... एपिल चौथे पे। 
आपने सच ही अमरुद का मानवी -करण किया है ,एक साम्य देखिये :


कुछ हैं छोटे. कुछ मझोले,
कुछ बड़े आकार के।
मौन आमन्त्रण सभी को,

दे रहे हैं प्यार से।

खरीद लो चौक  बाज़ार से ,जहां बिकतीं हैं फूले हुए फुल्कों से चोलियां और पहना दो इन अमरूदों को  सभी को खुश रहेंगी  ही हमझोलियाँ।
एक और साम्य देखिये नखशिख शब्द चित्र का :
आ गई बरसात तो,
अमरूद गदराने लगे।
स्वच्छ जल का पान कर,

डण्ठल पे इतराने लगे।।
अमरुद न हुए जैसे सद्यस्नाता मुग्धा नायिका हो बिहारी की -...... फिर उसके बाद हमें कुछ खबर नहीं होती। ... 
कच्ची इमली गदराई सावन में ,बुड्ढी  है लुगाई मस्ताई फागण में। 
सन्दर्भ -सामिग्री :(१ )https://www.youtube.com/watch?v=pYF2rwKJkAY

(२ )बालकविता "अमरूद गदराने लगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
आ गई बरसात तो,
अमरूद गदराने लगे।
स्वच्छ जल का पान कर,
डण्ठल पे इतराने लगे।।
--
डालियों पर एक से हैं,
रंग में और रूप में।
खिल रहे इनके मुखौटे,
गन्दुमी सी धूप में।।

--
कुछ हैं छोटे. कुछ मझोले,
कुछ बड़े आकार के।
मौन आमन्त्रण सभी को,
दे रहे हैं प्यार से।
--
किसी का मन है गुलाबी,
और किसी का है धवल।
पीत है चेहरा किसी का,
और किसी का तन सबल।।

--
स्वस्थ रहने के लिए,
खाना इसे वरदान है।

नाम का अमरूद है,

लेकिन गुणों की खान है।।


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विशेष :गुलाम नबी आज़ाद ,कपिल सिब्बल साहब ,मनीषतिवारी ,जितिन प्रसाद ,मुकुल वासनिक और इन जैसे आंच और साह वाले कुछ कर दिखाएँगे ,भगवान् इनका हौसला बनाये रहे

"विनाश काले विपरीत बुद्धि "
अफ़सोस ,यूपी में जितिन बन रहे निशाना :सिब्बल (एक खबर २८ अगस्त अंक )वैसे कांग्रेस के पास बचा ही क्या है ?कांग्रेस की गति  और मति ,वर्तमान रंगढंग पर बड़ी सटीक बैठतीं हैं भवानी दा की ये रचना: 

चार कौए उर्फ़ चार हौए


बहुत नहीं थे सिर्फ़ चार कौए थे काले
उन्होंने यह तय किया कि सारे उड़ने वाले

उनके ढंग से उड़ें, रुकें, खाएँ और गाएँ
वे जिसको त्योहार कहें सब उसे मनाएँ।

कभी-कभी जादू हो जाता है दुनिया में
दुनिया-भर के गुण दिखते हैं औगुनिया में

ये औगुनिए चार बड़े सरताज हो गए
इनके नौकर चील, गरूड़ और बाज हो गए।

हंस मोर चातक गौरैयें किस गिनती में
हाथ बाँधकर खड़े हो गए सब विनती में

हुक्म हुआ, चातक पंछी रट नहीं लगाएँ
पिऊ-पिऊ को छोड़ें कौए-कौए गाएँ।

बीस तरह के काम दे दिए गौरैयों को
खाना-पीना मौज उड़ाना छुटभैयों को

कौओं की ऐसी बन आयी पाँचों घी में
बड़े-बड़े मनसूबे आये उनके जी में

उड़ने तक के नियम बदल कर ऐसे ढाले
उड़ने वाले सिर्फ़ रह गए बैठे ठाले।

आगे क्या कुछ हुआ सुनाना बहुत कठिन है
यह दिन कवि का नहीं चार कौओं का दिन है

उत्सुकता जग जाए तो मेरे घर आ जाना
लंबा किस्सा थोड़े में किस तरह सुनाना!

 "जाको प्रभु दारुण दुख देही, 

ताकी मति पहले हर लेही|" 

"जाको विधि पूरन सुख देहीं, 

ताकी मति निर्मल कर देहि|"

एक तो कांग्रेस में पहले ही मतिमंद पैदा हुआ है जैसा बीज वैसा फल। बहनिया को कोई पूछता नहीं। वाड्रा साहब को हुड्डा साहब लील गए। सोनिया लाहौल बिला क़ूवत इस देश की ज़बान भी वह न सीख सकीं है क्या है उनके पास सिवाय इंदिरा परिवार की बहु होने के। 

विशेष :गुलाम नबी आज़ाद ,कपिल सिब्बल साहब ,मनीषतिवारी ,जितिन प्रसाद ,मुकुल वासनिक और इन जैसे आंच और साख़  वाले कुछ कर दिखाएँगे ,भगवान् इनका हौसला बनाये रहे। 

वीरेंद्र शर्मा ,८७० /३१ ,भू -तल,निकटस्थ एफएम स्कूल ,फरीदाबाद १२१ ००३ 
८५ ८८ ९८ ७१५० 

सोमवार, 24 अगस्त 2020

सुखी रहो निंदक जग माहीं, रोग न हो तन सारा। हमरी निंदा करने वाला, उतरै भवनिधि पारा॥

जिस कउ राखै सिरजनहारू। झख मारउ सगल संसारु।। (आदि श्री गुरुग्रंथ साहब ,गोंड महला पांच )

संत का लीआ धरति  बिदारउ। संत का निंदकु  अकास ते टारउ। संत कउ राखउ अपने जीअ नालि। संत उधारउ तत खिण  तालि | | १ | |  सोई संतु जि भावै राम। संत गोबिंद कै एकै काम। || १ | | रहाउ | | संत कै ऊपरि देई प्रभु हाथ। संत कै  संगि  बसै दिनु राति। सासि सासि संतह प्रतिपालि। संत का दोखी राज ते टालि | | २ | | संत की निंदा करहु न कोइ। जो निंदै तिस का पतनु  होइ। जिस कउ राखै सिरजन हारु। झख मारउ सगल संसारु | | ३ | | प्रभ अपने का भइआ बिसासु। जीउ पिंडु सभु (मू ० ८६७ /६८ )तिसकी रासि। नानक कउ उपजी परतीति। मनमुख हार गुरमुख सद जीति | | ४ | | १६ | | १८ | |   

संतों द्वारा तिरस्कृत जीव धरती पर रहने के योग्य नहीं है। संतों की निंदा करने वाले को आकाश से गिरा दिया जाना चाहिए। संतों का नाम अपने प्राणों के साथ रखा जाना चाहिए ,क्योंकि संतों की कृपा हो जाए तो क्षण भर में ही जीव का उद्धार हो सकता है।१।

संत वही है जो प्रभु को प्रिय हो ,जो प्रभु का प्रिय हो; वास्तव में संत और परमात्मा का एक ही काम है अर्थात  हरि और संत में अभेद होता है।|  (१ ) |

संत मिलें तो मैं मिल जाऊं संत न मोते न्यारे (उधौं मोहे संत सदा अति प्यारे। ...)

संतों को परमात्मा का वरद हस्त ,संरक्षण प्राप्त होता है। इसीलिए दिन रात उन्हीं के संग  रहना समीचीन (ठीक )है। परमात्मा श्वास -श्वास संतों का पालन करता है। संतों को कष्ट पहुंचाने वाला अपनी प्रभुसत्ता (राजपाट )खो बैठता है। | | २ | |

ऐ लोगों , संतों की निंदा मत करो ,निंदा करने वाले का पतन निश्चित होता है। (हालांकि संत ही कह गए हैं :

निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी  छवाय ,
बिन साबुन पानी बिना निर्मल होय सुभाय !

संत निंदा  प्रशंशा दोनों से ऊपर होते हैं। कुछ तो निंदक को अपना सबसे बड़ा मित्र समझते हैं। संत चरण दास कहते हैं :

साधो निंदक मित्र हमारा।
निंदक को निकटै ही राखूं होन न दें नियारा।

पाछे निंदा करि अघ धोवै, सुनि मन मिटै बिकारा।
जैसे सोना तापि अगिन मैं, निरमल करै सोनारा॥

घन अहरन कसि हीरा निबटै, कीमत लच्छ हजारा।
ऐसे जांचत दुष्ट संत कूं, करन जगत उजियारा॥

जोग जग्य जप पाप कटन हितु, करै सकल संसारा।
बिन करनी मम करम कठिन सब, मेटै निंदक प्यारा।

सुखी रहो निंदक जग माहीं, रोग न हो तन सारा।
हमरी निंदा करने वाला, उतरै भवनिधि पारा॥

निंदक के चरणों की अस्तुति, भाखौं बारंबारा।
'चरणदास' कहै सुनिए साधो, निंदक साधक भारा॥

वह परमात्मा जिसका रक्षक है ,सारा संसार चाहे झख मार ले ,उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। || 3 | |

होनी तो होके  रहे  लाख करे किन  कोय।

जाकू राखै साईंयां मार सके न कोय।

 फ़ानूस बन जिसकी हिफाज़त हवा करे ,

वो शम्म -अ क्या बुझे रोशन जिसे  ख़ुदा   करे।

 फ़ानूस  :शैंडेलियर्स ,Chendelliars ,Lamp shades

अपने प्रभु पर जब  विश्वास   जगता है ,तो जीवन तन मन को उसी की धरोहर मानकर उसी पर समर्पित कर देता है। गुरुनानक का  विश्वास है ,परमात्मा को समर्पित हो जाने वाला गुरुमुख सदा विजयी होता है ,मन के संकेतों पर आचरण करने वाला मन की मानने वाला मनमुख जीव जीवन में पराजित हो जाता है।
https://www.youtube.com/watch?v=lYsA9v_iC34

साधु निंदक मित्र हमारा... |श्री चरण दास जी महाराज पद | परम पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज ❣❣❣

 सत श्री अकालजियो !




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शनिवार, 1 अगस्त 2020

करते तुलसीदास भी कैसे मानस-नाद?-- महावीर का यदि उन्हें मिलता नहीं प्रसाद।

जैसे -जैसे पांच अगस्त का शुभ दिन पास आ रहा है भारत राममय हो उठा है।कलाकृतियां श्रृद्धा  का उद्वेलन हैं आलमी मेले का माहौल बन रहा है। भाग्य श्री -धनश्री वाटकर किशोरियां मानों लव कुश के नवावतार में स्वर माधुरी लिए चली आईं हैं आप भी रामभक्ति सरोवर का अवगाहन कीजिये गोता लगाइये सरयू में स्वरसाधना में :

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की ,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की।

जम्बूद्वीपे भरत खंडे आर्यावर्ते भारतवर्षे ,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,
यही जन्मभूमि है परम् पूज्य श्री राम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की ,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की।.

रघुकुल के राजा धर्मात्मा ,
चक्रवर्ती दसरथ पुण्य आत्मा  ,
संतति हेतु यज्ञ करवाया ,
धर्म यज्ञ का शुभ फल पाया।
नृप घर जन्मे चार कुमारा ,
रघुकुल दीप जगत आधारा ,
चारों भ्रातों के शुभ नामा ,
भरत ,शत्रुघ्न ,लक्ष्मण रामा। .

गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके ,
'अल्पकाल विद्या सब पाके ,
पूरण हुई शिक्षा ,रघुवर पूरण काम की ,
हमकाथा सुनाते राम सकल गुणधाम की ,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की।.

मृदु स्वर कोमल भावना ,
रोचक प्रस्तुति ढंग ,
एक एक कर वर्रण  करें ,
लव कुश राम प्रसंग ,
विश्वामित्र महामुनि राई ,
तिनके संग चले दोउ भाई ,
कैसे राम ताड़का मारी ,
कैसे नाथ अहिल्या ताड़ी।

मुनिवर विश्वामित्र तब ,
संग ले  लक्ष्मण  राम ,
सिया स्वयंवर देखने ,
पहुंचे मिथिला धाम।  .

जनकपुर उत्सव है भारी  ,
जनकपुर उत्सव है  भारी  ,
अपने वर का चयन करेगी, सीता सुकुमारी ,
जनकपुर उत्सव है भारी ।
https://www.youtube.com/watch?v=JWPyJMfTa6o

राम, तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है।
कोई कवि बन जाय, सहज संभाव्य है।
"हम चाकर रघुवीर के, पटौ लिखौ दरबार;
अब तुलसी का होहिंगे नर के मनसबदार?
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उलटो-सूधो ऊगि है खेत परे को बीज।
बनें सो रघुवर सों बनें, कै बिगरे भरपूर;
तुलसी बनें जो और सों, ता बनिबे में धूर।
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अनुचर-
मैथिलीशरण
दीपावली 1988


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