वो काना जो अपने नाम को भी धन्य नहीं करता न करुणा है न निधि -सरे आम कहता है राम तो थे ही नहीं। और हिन्दू समाज प्रतिक्रिया न करे तो सब ठीक और इधर कोई इस्लाम के पैगंबर पर ऊँगली उठादे -सिर्फ इशारा करे तो ऊँगली काट दी जाए। क्या अजब राजनीतिक चुतियापा है।
एक कलाखोर हिन्दू देवी देवताओं की मैथुनी तस्वीर बनाए तो सब ठीक और... अब क्या लिखें इसके आगे।और अब क्या लिखें आगे हमें खुद शर्म आती है कैसे कैसे नमूने हिन्दू कहलाते।
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